अगर आप जमीन या मकान खरीदने जा रहे हैं और मन में यह सवाल आ रहा है — “कहीं यह रजिस्ट्री फर्जी तो नहीं?” — तो यह आर्टिकल आपके लिए ही लिखा गया है।
भारत में प्रॉपर्टी धोखाधड़ी के मामले हर साल बढ़ रहे हैं। फर्जी दस्तावेज, नकली मालिक, और जाली सील — ये सब अब आम होते जा रहे हैं। एक गलत कदम और आपकी जिंदगी भर की कमाई डूब सकती है।

फर्जी रजिस्ट्री क्या होती है?
फर्जी रजिस्ट्री वह दस्तावेज होता है जिसमें असली मालिक की जानकारी या सहमति के बिना, नकली हस्ताक्षर, जाली सील, या झूठी जानकारी भरकर संपत्ति का हस्तांतरण (Transfer) दिखाया जाता है।
यानी सीधे शब्दों में — जो जमीन आपकी नहीं है, उस पर कागज बनाकर आपको बेच देना, या आपकी जमीन बिना आपकी मर्जी के किसी और के नाम करना।
फर्जी रजिस्ट्री के मुख्य प्रकार

1. जाली Sale Deed (विक्रय पत्र)
नकली रजिस्ट्री नंबर, झूठी तारीख, और फर्जी हस्ताक्षर से तैयार की गई बिक्री की रजिस्ट्री।
2. एक ही प्रॉपर्टी को कई लोगों को बेचना
एक ही जमीन को 2-3 अलग-अलग लोगों को बेचना — पहले वाली रजिस्ट्री असली और बाकी नकली।
3. फर्जी Power of Attorney (POA)
मालिक की नकल करके या फर्जी POA बनाकर संपत्ति बेच देना।
4. मृत या अनुपस्थित मालिक की जमीन हड़पना
NRI या बुजुर्ग मालिक की जमीन पर नकली दस्तावेज बनाकर कब्जा।
5. विवादित या सरकारी जमीन की फर्जी बिक्री
ऐसी जमीन जो कानूनी विवाद में है या सरकार की है, उसे प्राइवेट बताकर बेचना।
फर्जी रजिस्ट्री की पहचान के 7 तरीके
✅ तरीका 1 — Sub-Registrar Office से वेरिफाई करें
हर असली रजिस्ट्री पर एक Registration Number होता है। यह नंबर Sub-Registrar Office (SRO) के रिकॉर्ड में दर्ज होता है।
क्या करें:
- अपने जिले के Sub-Registrar Office जाएं
- रजिस्ट्री का नंबर और तारीख बताएं
- ऑफिस से वेरिफाई कराएं कि यह रजिस्ट्री उनके रिकॉर्ड में है या नहीं
⚠️ अगर SRO के रिकॉर्ड में यह रजिस्ट्री नहीं मिली — 100% फर्जी है।
✅ तरीका 2 — Encumbrance Certificate (EC) चेक करें
Encumbrance Certificate (EC) यानी “भार प्रमाण पत्र” — यह दस्तावेज पिछले 10-15 साल में प्रॉपर्टी पर हुई हर ट्रांजेक्शन की जानकारी देता है।
इससे पता चलता है:
- जमीन पर कोई लोन (Mortgage) तो नहीं है
- पहले कितनी बार बिकी है
- कोई कानूनी विवाद (Dispute) तो नहीं
कैसे मिलेगा: अधिकांश राज्यों में Sub-Registrar Office या राज्य के ऑनलाइन पोर्टल से मिलता है।
✅ तरीका 3 — दस्तावेज की भौतिक जांच करें
असली रजिस्ट्री और नकली रजिस्ट्री में कुछ स्पष्ट फर्क होते हैं:
| जांच बिंदु | असली रजिस्ट्री | फर्जी रजिस्ट्री |
| कागज की गुणवत्ता | मोटा, सरकारी स्टाम्प पेपर | पतला या साधारण कागज |
| Watermark | सरकारी वॉटरमार्क मौजूद | वॉटरमार्क नहीं या नकली |
| हस्ताक्षर और सील | स्पष्ट, एक जैसी | धुंधली, अलग-अलग फॉन्ट |
| Spelling | सही | गलत Spelling, टाइपो |
| Stamp Duty | सही राशि | कम या गलत राशि |
| Registration Number | रजिस्ट्री में दर्ज | गायब या नकली |
✅ तरीका 4 — खसरा-खतौनी से मिलान करें
खसरा-खतौनी राज्य सरकार का वह दस्तावेज है जिसमें जमीन के असली मालिक का नाम दर्ज होता है।
रजिस्ट्री में नाम और खसरा-खतौनी में नाम — दोनों मिलते हैं या नहीं, यह जरूर चेक करें।
अधिकांश राज्यों में खसरा-खतौनी ऑनलाइन देख सकते हैं:
- UP: upbhulekh.gov.in
- MP: mpbhulekh.gov.in
- Rajasthan: apnakhata.raj.nic.in
- Maharashtra: bhulekh.mahabhumi.gov.in
- Gujarat: anyror.gujarat.gov.in
✅ तरीका 5 — विक्रेता की पहचान सत्यापित करें
2025 से नए नियम के अनुसार रजिस्ट्री के लिए Aadhaar e-KYC और बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन अनिवार्य हो गया है।
क्या करें:
- विक्रेता का Aadhaar Card और PAN Card ओरिजिनल देखें
- Aadhaar में दिया पता और प्रॉपर्टी का पता मिलाएं
- अगर Power of Attorney पर रजिस्ट्री हो रही है — वह POA भी Sub-Registrar Office में रजिस्टर्ड होनी चाहिए
✅ तरीका 6 — Title Deed की Chain जांचें
Title Deed Chain यानी इस जमीन का मालिकाना हक कब-कब और किस-किस के नाम रहा — कम से कम पिछले 20-30 साल का।
अगर Chain में कोई Gap है — जैसे 1995-2010 के बीच कोई रिकॉर्ड नहीं — तो यह बड़ा खतरे का संकेत है।
✅ तरीका 7 — कोर्ट में विवाद चेक करें
खरीदने से पहले ecourts.gov.in पर जाकर देखें कि उस प्रॉपर्टी या विक्रेता के नाम पर कोई कानूनी मामला (Case) तो नहीं चल रहा।
ऑनलाइन वेरिफिकेशन कैसे करें (Step-by-Step)
Step 1: अपने राज्य का भूलेख/भू-अभिलेख पोर्टल खोलें (ऊपर लिंक दिए हैं)
Step 2: “खसरा / खतौनी / जमाबंदी” सेक्शन में जाएं
Step 3: जिला → तहसील → ग्राम/शहर चुनें
Step 4: खाता नंबर या खसरा नंबर डालें (यह रजिस्ट्री में लिखा होता है)
Step 5: मालिक का नाम, जमीन का क्षेत्रफल, और अन्य जानकारी रजिस्ट्री से मिलाएं
Step 6: अगर जानकारी मेल नहीं खाती — तुरंत Sub-Registrar Office जाएं
खतरे के संकेत (Red Flags)
अगर नीचे दी गई कोई भी बात सच हो — तुरंत रुकें और वेरिफाई करें:
🚩 विक्रेता जल्दी डील फाइनल करने का दबाव बना रहा है
🚩 प्रॉपर्टी की कीमत बाजार से बहुत कम है
🚩 विक्रेता ओरिजिनल दस्तावेज दिखाने से मना कर रहा है
🚩 सिर्फ Photocopy दी जा रही है, Original नहीं
🚩 Cash में पूरा पैसा देने की मांग
🚩 रजिस्ट्री पर Spelling Mistakes या Suspicious Stamp
🚩 Aadhaar/PAN Details में गड़बड़ी
🚩 Title Deed Chain में Gap
🚩 एक ही प्रॉपर्टी के लिए कई Buyers
2025-26 के नए नियम और सुरक्षा उपाय
सरकार ने फर्जी रजिस्ट्री रोकने के लिए कई नए कदम उठाए हैं:
1. Aadhaar e-KYC अनिवार्य: अब बिना आधार वेरिफिकेशन के रजिस्ट्री नहीं होगी। खरीदार और विक्रेता दोनों का बायोमेट्रिक (Fingerprint/Face) सत्यापन जरूरी है।
2. वीडियो रिकॉर्डिंग: रजिस्ट्री की पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग अनिवार्य होगी जो भविष्य में सबूत का काम करेगी।
3. Online Slot Booking: रजिस्ट्री ऑफिस में अब Online Slot लेना जरूरी है — इससे फर्जी रजिस्ट्री का मौका कम होगा।
4. डिजिटल सिग्नेचर: बिना मालिक की सहमति और डिजिटल सिग्नेचर के रजिस्ट्री नहीं होगी।
5. पुराने रिकॉर्ड डिजिटल: पुरानी सभी रजिस्ट्री के रिकॉर्ड भी डिजिटल किए जा रहे हैं।
फर्जी रजिस्ट्री पाई जाए तो क्या करें?
तत्काल कदम:
1. नजदीकी थाने में FIR दर्ज करें सभी दस्तावेज और सबूत लेकर पुलिस स्टेशन जाएं।
लागू धाराएं:
- IPC धारा 420 — धोखाधड़ी
- IPC धारा 467 — दस्तावेजों का फर्जीवाड़ा
- IPC धारा 468 — धोखे के उद्देश्य से फर्जीवाड़ा
- IPC धारा 471 — फर्जी कागज को असली बताना
दोषी पाए जाने पर 7 साल तक की जेल और जुर्माना हो सकता है।
2. Inspector General of Registration (IGR) पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत करें उत्तर प्रदेश, बिहार जैसे कई राज्यों में यह सुविधा उपलब्ध है।
3. सिविल कोर्ट में याचिका दाखिल करें फर्जी रजिस्ट्री को रद्द (Cancel) कराने के लिए Civil Court में जाएं।
4. वकील की मदद लें एक अनुभवी Property Lawyer की सलाह लेना जरूरी है — वो सही धाराएं और अगले कदम बताएगा।
💡 ध्यान रखें: अगर 30 दिन में पुलिस कार्रवाई नहीं करे, तो पावती लेकर सीधे CJM Court में याचिका दाखिल करें।
FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
❓ Q1. क्या रजिस्ट्री की वेरिफिकेशन ऑनलाइन हो सकती है?
✅ हाँ। अधिकांश राज्यों जैसे UP, MP, Maharashtra, Karnataka, Delhi में ऑनलाइन भूमि रिकॉर्ड पोर्टल हैं। वहाँ से खसरा-खतौनी और Transaction History देख सकते हैं।
❓ Q2. Encumbrance Certificate (EC) कहाँ से मिलेगा?
✅ Sub-Registrar Office से या राज्य के ऑनलाइन Registration Portal से। यह 10-15 साल की प्रॉपर्टी हिस्ट्री बताता है।
❓ Q3. Power of Attorney (POA) पर हुई रजिस्ट्री असली है या नहीं, कैसे पता करें?
✅ POA Sub-Registrar Office में रजिस्टर्ड होनी चाहिए। उसे SRO में जाकर वेरिफाई करें। बिना Registration के POA कानूनी रूप से मान्य नहीं होती।
❓ Q4. फर्जी रजिस्ट्री में कितनी सजा होती है?
✅ IPC की धारा 468 के तहत धोखे के उद्देश्य से दस्तावेज जालसाजी पर 7 साल तक की जेल और जुर्माने का प्रावधान है।
❓ Q5. क्या Photocopy रजिस्ट्री पर भरोसा करना सही है?
✅ बिलकुल नहीं। हमेशा Original Documents माँगें और Sub-Registrar Office से वेरिफाई करें।
❓ Q6. अगर विक्रेता का नाम खतौनी में नहीं है तो?
✅ इसका सीधा मतलब है कि वह असली मालिक नहीं है। ऐसी स्थिति में Deal बिल्कुल मत करें।
❓ Q7. RERA से प्रॉपर्टी फ्रॉड कैसे रोकें?
✅ नई बिल्डिंग या अपार्टमेंट खरीदते समय RERA पोर्टल पर Builder का Registration नंबर जरूर चेक करें। RERA Registered Project में धोखे की संभावना कम होती है।
निष्कर्ष
फर्जी रजिस्ट्री की पहचान करना कोई मुश्किल काम नहीं है — बस थोड़ी सावधानी और सही जानकारी चाहिए।
याद रखें:
- हमेशा Original Documents माँगें
- Sub-Registrar Office से वेरिफाई जरूर करें
- Encumbrance Certificate और खसरा-खतौनी मिलाएं
- कोई भी Red Flag दिखे तो Deal रोकें
- एक Property Lawyer की सलाह लेना सबसे सुरक्षित कदम है
अगर आप जमीन खरीदने की प्रक्रिया में हैं — अभी अपने राज्य के भूलेख पोर्टल पर जाकर वेरिफिकेशन करें। एक छोटी सी लापरवाही आपकी जिंदगी भर की कमाई डुबो सकती है।
📌 कोई सवाल है? नीचे Comment में पूछें — हम जवाब देंगे।
Disclaimer: यह आर्टिकल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। किसी भी कानूनी मामले में एक योग्य वकील की सलाह लें।
स्रोत: Sub-Registrar Office दिशानिर्देश, राज्य भूलेख पोर्टल, भारतीय दंड संहिता (IPC), RERA Guidelines